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Wednesday, April 21, 2010

और अब ये फूल

और अब ये फूल ऋतुसंहार को आए
सूर्य को सूरज - मुखी बन कर बहुत भाए

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3 comments:

Udan Tashtari said...

मनभावन!!

Shekhar Kumawat said...

bahut sundar phool he

संजय भास्कर said...

बहुत खूब, लाजबाब !