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Wednesday, April 28, 2010

तिपतिया

तिपतिया यानी तीन पंक्तियों की रचनाएँ। कोई इस तरह की रचनाओं को हाइकु कहता है, (उसका अलग शिल्प है), गुलज़ार त्रिवेणी कहते हैं, तो कोई कुछ तो कोई और कुछ …
मैं 'तिपतिया' कहता हूँ, जिसे अंग्रेज़ी में 'क्लोवर' कहते हैं। बचपन में जंगली घास की तरह उगा हुआ पाते थे, पत्ती तोड़कर खा लेते थे - खट्टे से स्वाद का, अजब सी मिठास से जुड़ा, मगर आख़िरश ज़ुबाँ पे खट्टा स्वाद ही रह जाता था। तो मेरी कुछ तिपतियाँ पेश हैं आज…
BLOG tree with birds 
* ब्लॉगरी
ब्लॉग दुनिया पुराना नीम का पेड़,
ब्लॉगिये पंछी सुबह निकले थे,
शाम को दिन गँवा के लौटे हैँ।
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sunset* दिन
सुबह पानी में जगमगा के उगा
तवील राहों पे बेवजह तपा
और फिर पानियों में कूद गया
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Poshak

* पोशाक
रेशमी ख़ाब, हक़ीक़त सूती
पसीनोँ मेँ नहाई रहती है
और बस इसलिए नहीं जलती…
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TICA smaller
* बड़े शहर की हसीनाएँ
जिस्म छूने से कुछ गुरेज़ नहीं
दिल नहीं छूतीं,चमकदार हैं सब-
ये हसीं पुतलियाँ क्या फ़ैक्ट्रियों में बनती हैं?
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* लोग
Mumbai Marine Drive crowded
पत्थरों पे सागर की ओर पैर लटकाए-
सर झुकाए बैठे सब - साँझ ढले देर हुई
मेरे फ़्लैट जैसी क्या सब की गुम हुई चाभी?
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  * बड़ा शहर
Night Mumbai
तेज़ रफ़्तारें, चमचमाती कारें, सब रौशन-
दाम कुछ चीज़ों पे, कुछ पे नहीं-बिकाऊ सभी,
ये बड़ा शहर बड़ी सी दुकान लगता है !
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7 comments:

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

बहुत अच्छा लगा आपके तिपतिया पढकर ...
जैसे गंगा, यमुना और सरस्वती का मिलन है ..

आनन्‍द पाण्‍डेय said...

great sir

M VERMA said...

बहुत सुन्दर
वाह

दिलीप said...

pehli baar haiku padha ..bahut sundar likha...

हिमान्शु मोहन said...

@ दिलीप
नहीं दिलीप जी, ये हाइकु नहीं हैं। बस तीन पंक्तियों के मुक्तक हैं। हाइकु में प्रथम, द्वितीय और तृतीय पंक्ति का एक निश्चित अनुपात और वर्ण-संख्या(syllable count)होता है।
आपकी प्रशंसा का धन्यवाद।

Amitraghat said...

"सभी बेहतरीन हैं पर "दिन" को क्या खूबी से समेटा है..."

Udan Tashtari said...

अहा!! अति सुन्दर!