साथी

Monday, July 26, 2010

तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है…

ये एक उम्दा मिसाल है कि एक ख़ूबसूरत गाने का घटिया पिक्चराइज़ेशन कैसे किया जा सकता है। मुझे इस गाने के तीनों वर्शन बहुत पसन्द हैं - सुनने में।

इससे जुड़ीं अन्य प्रविष्ठियां भी पढ़ें


9 comments:

Udan Tashtari said...

सुनने में तो यह गीत मुझे भी बहुत पसंद है.

draradhana said...

ओह ! मैंने इसके पहले इस गाने का पिक्चराइजेशन नहीं देखा था. गाना तो मुझे भी अच्छा लगता है... सुनने में.

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी said...

सहमत हूँ , महराज !

प्रवीण पाण्डेय said...

अभी तक तो देखा नहीं था। देखकर इस संवेदनहीनता पर पूर्ण विश्वास हो गया।

Shiv said...

गाना मुझे बहुत पसंद है. फिल्मांकन के बारे में आपने सही कहा.

Sanjeet Tripathi said...

पहली बार इस गाने का फिल्मांकन देखा, सुनने में जितना बेहतरीन गाना है, देखने में लगता है की निर्देशक क्या सबसे बड़ा गधा था जो ऐसा फिल्मांकन किया. वाकई आपका कथन एकदम सत्य है

anju said...

yeh gana mujhe bhi bahut jyada pasand hai.iske saath kuch meethi yaadain judi hain .
aap kitni baariki se note karte hain .maine kabhi is drishti se socha hi nahin.sach main filmankan bahut hi ghatiya hai.

Virendra Singh Chauhan said...

Himaanshu ji ..Gaana mujhe bhi bahut pasand hai. Filmaankan ke baare men kuchh nahi kah sakta.

E-Guru Rajeev said...

व्यस्तताओं ने कभी संगीत-प्रेमी होने ही नहीं दिया. आप तो मुझे बिगाड़ रहे हैं.
हो सकता है कि कल मेरी मम्मी आपसे लड़ने पहुँच जायें. :-)