यथासंभव यह ब्लॉग हिन्दी में, हिन्दी हेतु रहेगा। सर्च इंजनों या अन्य तकनीकी कारणों से कुछ कोटि-शब्द अंग्रेज़ी में भी हो सकते हैं। मूलत: यह एक इलाहाबादी ब्लॉग है उस संगम के तीर(तट) से, जिसमें पवित्र नदियों गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का मिलन होता है जो यहाँ की साहित्यिक-सांस्कृतिक अन्तर्धारा में प्रवाहित है।
साथी
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Friday, April 23, 2010
Wednesday, April 7, 2010
नई रचना संगम तीरे पर
नई रचनाएँ http://sangam-teere.blogspot.com पर ही लगातार आती रहेंगी, जैसे अभी चल रहा है।
Friday, March 26, 2010
अरे बड़ी गड़बड़ हो गई!
अरे वाकई बड़ी गड़बड़ हो गई। हमने इस ब्लॉग पर आकर देखा ही नहीं - अइसे गए फेरि नहिं बहुरे… यानी 'मोहन' नाम सार्थक कर दिया…
और यहाँ भाई लोगों ने इतने ढेर सारे संदेश दे डाले। अशिष्टता हो गई, किसी को धन्यवाद ज्ञापित भी नहीं किया और कुछ लिखा भी नहीं यहाँ। हाथ साफ़ करते रहे पोस्टरस पर जाकर, जगह-जगह ऑटो-पोस्ट करवा कर।
सब को प्रणाम, सलाम, बड़ों को प्यार बच्चों को राम-राम।
देवियों और सज्जनों, यानी ख़वातीनों-हाज़रात! शुरूआत में तो कुछ खुराफ़ात नहीं करनी चाहिए मगर क्या करूँ - जो गुज़री है मुझ पर इस ब्लॉगियाने की कोशिश में - शुरूआती दौर में, पहले वही बयान करूँगा।
कल से शुरू, मगर तब तक आप से निवेदन है कि आप मेरे पोस्टरस यानी इलाहाबादी की बतकही, दस-बहाने और इब्तिदा=आग़ाज़=शुरूआत=पहल में से जहाँ ठीक समझें टहल आएँ, तब तक मैं यहाँ अपने अनुभव दर्ज करता हूँ।
अगर आप को शेर-ओ-शायरी पसंद है तो आप यक़ीन जानें सुख़नवर आपके इंतज़ार में अपना दीवान और याददाश्त के पन्ने, दोनों लिए बैठा है , अपना और दूसरों, दोनों का क़लाम सुनाने को।
और यहाँ भाई लोगों ने इतने ढेर सारे संदेश दे डाले। अशिष्टता हो गई, किसी को धन्यवाद ज्ञापित भी नहीं किया और कुछ लिखा भी नहीं यहाँ। हाथ साफ़ करते रहे पोस्टरस पर जाकर, जगह-जगह ऑटो-पोस्ट करवा कर।
सब को प्रणाम, सलाम, बड़ों को प्यार बच्चों को राम-राम।
देवियों और सज्जनों, यानी ख़वातीनों-हाज़रात! शुरूआत में तो कुछ खुराफ़ात नहीं करनी चाहिए मगर क्या करूँ - जो गुज़री है मुझ पर इस ब्लॉगियाने की कोशिश में - शुरूआती दौर में, पहले वही बयान करूँगा।
कल से शुरू, मगर तब तक आप से निवेदन है कि आप मेरे पोस्टरस यानी इलाहाबादी की बतकही, दस-बहाने और इब्तिदा=आग़ाज़=शुरूआत=पहल में से जहाँ ठीक समझें टहल आएँ, तब तक मैं यहाँ अपने अनुभव दर्ज करता हूँ।
अगर आप को शेर-ओ-शायरी पसंद है तो आप यक़ीन जानें सुख़नवर आपके इंतज़ार में अपना दीवान और याददाश्त के पन्ने, दोनों लिए बैठा है , अपना और दूसरों, दोनों का क़लाम सुनाने को।
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