साथी

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Sunday, March 14, 2010

मुलाकात...


यह शायद हमारे अपने चुने विकल्प हैँ, या जीवन के ... पर जो भी हैं, सिर माथे हैँ।

मुलाकात..


घर तक नहीँ आ सका मगर उसे घर का खाना पहुँचा दिया मैँने, फिर निरीक्षण पर निकल गया। उसकी गाड़ी डेढ़ घण्टे बाद गई।

मुलाकात


कल 13 मार्च को मेरी मुलाकात हुई अपने बेटे सत्यांशु से, इलाहाबाद स्टेशन पर। हावड़ा से मुंबई जाते हुए..